मंगल दोष — जिसे मांगलिक दोष या कुज दोष भी कहते हैं — तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों में स्थित हो। माना जाता है कि ऐसी स्थिति में मंगल की उग्र और तीव्र ऊर्जा विवाह और दांपत्य जीवन को प्रभावित कर सकती है। यह भारत में विवाह-मिलान का एक बहुत प्रचलित विषय है।
जब मंगल पहले (1), दूसरे (2), चौथे (4), सातवें (7), आठवें (8) या बारहवें (12) भाव में हो, तो वह मांगलिक माना जाता है। इनमें 7वाँ भाव (विवाह) और 8वाँ भाव (आयु व दांपत्य सुख) सबसे महत्वपूर्ण हैं।
आधुनिक व शुद्ध पद्धति में मंगल की स्थिति केवल लग्न से नहीं, बल्कि तीन बिंदुओं से देखी जाती है — लग्न (Ascendant), चंद्र (Moon) और शुक्र (Venus)। जितने अधिक बिंदुओं से मंगल दोष वाले भाव में पड़े, दोष उतना प्रबल:
मंगल दोष हमेशा हानिकारक नहीं होता। कई शास्त्रीय नियम इसे रद्द या कम कर देते हैं — जैसे मंगल का अपनी राशि (मेष/वृश्चिक) में होना, मकर में उच्च का होना, या बृहस्पति/बुध/चंद्र के साथ युति। सबसे बड़ी राहत — यदि विवाह में दोनों साथी मांगलिक हों, तो दोष आपस में रद्द हो जाता है।
नहीं — यह डरने की बात नहीं है। लगभग 40% कुंडलियों में यह पैटर्न मिलता है और अधिकांश लोग सुखी वैवाहिक जीवन जीते हैं। "मांगलिक" केवल एक कुंडली-विशेषता है; असली प्रभाव दोष-भंग कारकों और पूरी कुंडली से तय होता है।
प्रचलित उपायों में हनुमान जी की उपासना व हनुमान चालीसा, मंगलवार का व्रत, लाल वस्तुओं का दान, और प्रबल दोष में कुंभ विवाह या मंगल शांति पूजा शामिल हैं। रत्न (मूंगा) केवल विशेषज्ञ परामर्श के बाद ही धारण करें।
यह जाँच स्विस एफेमेरिस से निकाली गई मंगल की वास्तविक स्थिति पर आधारित है — कोई अनुमान नहीं। सही परिणाम के लिए सटीक जन्म समय व स्थान डालें।