शनि साढ़े साती शनि (Saturn) ग्रह का वह गोचर है जब शनि आपकी जन्म चंद्र राशि से 12वें, 1वें और 2वें भाव से होकर गुज़रता है। शनि एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष रहता है, इसलिए तीनों भावों को पार करने में लगभग साढ़े सात (7.5) वर्ष लगते हैं — इसी से इसका नाम "साढ़े साती" पड़ा।
जब शनि चंद्र से 4वें (कंटक शनि) या 8वें (अष्टम शनि) भाव में हो, तो वह ढैया कहलाती है — लगभग 2.5 वर्ष की "छोटी पनौती"। अष्टम शनि आम तौर पर अधिक परीक्षा लेने वाला माना जाता है। शनि जब चंद्र से 3, 6 या 11वें भाव में हो तो प्रायः शुभ फल देता है।
नहीं। शनि "न्याय व कर्म" का ग्रह है — यह मेहनत, ईमानदारी व धैर्य को पुरस्कृत करता है और शॉर्टकट, अहंकार व झूठ की परीक्षा लेता है। कई लोग साढ़े साती में ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ पाते हैं। यह कठिनाई के साथ-साथ परिपक्वता व मज़बूत नींव भी देती है।
प्रमुख उपाय — शनिवार को शनि देव व हनुमान जी की पूजा, "ॐ शं शनैश्चराय नमः" जाप, सरसों/तिल तेल का दीपक, काले तिल/तेल/वस्त्र का दान, और बुज़ुर्गों व ज़रूरतमंदों की सेवा। नीलम रत्न केवल विशेषज्ञ परामर्श के बाद।
यह जाँच आपकी जन्म चंद्र राशि और वर्तमान शनि गोचर (स्विस एफेमेरिस) पर आधारित है — कोई अनुमान नहीं। अवधि अनुमानित है क्योंकि शनि की वक्री गति से राशि-प्रवेश की तिथि थोड़ी बदल सकती है।